
फतेहपुर। जनपद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की कार्यशैली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। शनिवार को जिले के चिकित्साधिकारियों ने सामूहिक रूप से ज्ञापन देकर CMO की कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवहार को लेकर कई सवाल उठाए थे। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि लगातार निगरानी, स्पष्टीकरण, प्रशासनिक दबाव और कुछ मामलों में अधिकारों के कथित हस्तक्षेप के कारण चिकित्साधिकारियों में मानसिक दबाव की स्थिति बन रही है। स्थिति में सुधार नहीं होने पर प्रभारी चिकित्साधिकारियों ने सामूहिक रूप से प्रशासनिक प्रभार छोड़ने की बात कही थी।
डॉक्टरों के इस रुख के बाद अब CMO की ओर से भी सफाई सामने आई है। CMO का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप स्वास्थ्य विभाग को संचालित करना और व्यवस्थाओं की जांच-पड़ताल करना विभागीय जिम्मेदारी का हिस्सा है। उनका कहना है कि यदि अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा करना, व्यवस्थाओं की जांच करना और शासन के निर्देशों के अनुसार काम कराना उत्पीड़न नहीं है तो इसे उत्पीड़न किस आधार पर कहा जा रहा है, इस पर भी सवाल खड़ा होता है।
यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद फतेहपुर के नाराज डॉक्टर क्या अपने रुख पर कायम रहेंगे या फिर मामले को लेकर चुप्पी साध लेंगे। शनिवार को सामूहिक ज्ञापन और प्रशासनिक प्रभार छोड़ने की चेतावनी के बाद स्वास्थ्य विभाग में चर्चाओं का दौर तेज है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डॉक्टरों और CMO के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या विवाद और आगे बढ़ता है।
वहीं, दो महिला चिकित्साधिकारियों के इस्तीफे का मामला भी इस विवाद के बीच लगातार तूल पकड़ रहा है। डॉक्टरों द्वारा दिए गए ज्ञापन में दावा किया गया है कि वर्तमान परिस्थितियों सहित अन्य कारणों से महिला चिकित्साधिकारियों में मानसिक तनाव और हतोत्साह की स्थिति बनी है। ज्ञापन में डॉ. अपूर्वा पाल और डॉ. शिवानी बाजपेयी के लगभग 14 वर्ष की शासकीय सेवा के बाद त्यागपत्र देने का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि विभाग में महिला चिकित्साधिकारियों की संख्या पहले से कम है और वर्तमान परिस्थितियों में कुछ अन्य चिकित्साधिकारी भी त्यागपत्र देने पर विचार कर रहे हैं।
अब मामला केवल CMO की कार्यशैली बनाम डॉक्टरों की नाराजगी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, चिकित्साधिकारियों के अधिकार, कार्य वातावरण और स्वास्थ्य विभाग में तालमेल का मुद्दा बनता जा रहा है। स्वतंत्रता दिवस के बाद डॉक्टर क्या कदम उठाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।







