फतेहपुर – शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 403 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 403 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के. पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे । काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां, कर रहे, हम तेरी जयकार।
मां, चरणों की भक्ति दो, करो नमन स्वीकार।। पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- शारदीय नवरात्र में सजे भव्य दरबार।
घर -मंदिर सर्वत्र है, मां की जय- जयकार ।। डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – नारी अब अधिकार मांगती ,नहीं चाहती कृपा मात्र ही ।
तन -मन -धन वा लगन से, सिद्ध कर रही योग्य पात्र भी ।। दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- शारदीय नवरात्रि की ,महिमा कही न जाय।
भवम् -भवानी भक्ति करि, भवसागर तरि जाय।। प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – खुशखबरी है ,माता रानी, हाथी पर चढ़ आ रहीं।
शुभ नवरात्रि , बधाई सबको, सकल दिशाएं गा रहीं।। डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – इस दहेज कानून का, दुरुपयोग नित होय। संशोधन ऐसा करें, गलत फंसे ना कोय।। काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये- पितृ लोक पहुंचे पितर ,पा श्रद्धा- सत्कार।
नवदुर्गा में कीजिए, माता की जय कार।। कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने प्रसाद के रूप में सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।
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शारदीय नवरात्र में सजे भव्य दरबार। घर -मंदिर सर्वत्र है, मां की जय- जयकार ।।
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