Fatehpur: शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 385 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के.पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के महंत स्वामी रामदास उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के.पी .सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- मातु सरस्वती आइए, कविजन करें पुकार।
कविता में नवशक्ति भर , करो नवल श्रृंगार।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- भारत देश की मां -बहनों का जो पोंछें सिंदूर।
उनके सर्वनाश से कम पर, कुछ भी नामंजूर।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – सतगुरु की सेवा किये, ज्ञान कपाट खुलंत।
विषय- विकारक- पाश को, होय तुरत ही अंत।। प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – खून औ पानी साथ बहे ना, घृणा- प्रेम का संग बेमेल। खून करो तुम, दें हम पानी, नहीं चलेगा अब यह खेल ।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – बंद करो आतंक पाक, वरना होगा भारी विनाश।
खाली करिये पी. ओ. के . को , सुख से रहिए अपने निवास।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये- आबो-हवा में घुल के संवर जाए तो अच्छा।
ये जज्बा हर एक दिल में उतर जाय तो अच्छा।।
ऐ मुल्क , तेरे प्यार में जीऊं भी औ मरूं,
रब मुझ पे ये रहमो-करम कर जाय तो अच्छा।।
कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।







