फतेहपुर- शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 389 वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के.पी. सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के महंत स्वामी रामदास उपस्थित रहे । काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के. पी . सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भाव प्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां आइए, होकर हंस सवार।
सिंहासन आरूढ़ हो,दो करुणा की धार ।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- माता पृथ्वी से बड़ी, पिता बड़ा आकाश। उसकी छाया के तले, सब देवों का वास ।डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – कर्म से भोग, भोग से कर्म, इसी में निहित मनुज- पुरुषत्व।
इसी से गतिमय यह संसार, इसी में छिपा हुआ ईशत्व।दिनेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- स्वाध्याय , संतोष,तप, शुचिता भी हो संग ।
ईश्वर का प्राणिधान भी , योग पतंजलि अंग।प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – लू , डायरिया और कालरा, गर्मी लायी रोग तमाम। हल्का भोजन, शुद्ध -साफ जल, बचें धूप से, कुछ विश्राम।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – प्लेन क्रैश ऐसा हुआ, पूरा देश उदास। हुए कालवश जन सभी, बचा एक विश्वास ।काव्य गोष्ठी के आयोजक एवं संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने भाव एक गीत के माध्यम से कुछ यों व्यक्त किये- पालनकर्ता है पिता, करता हर उपकार। उसकी शिक्षा जगत में, है वेदों का सार ।कार्यक्रम के अंत में स्वामी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।
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Fatehpur: सरस्वती मां आइए, होकर हंस सवार।
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