फतेहपुर। सहकारिता की त्रिस्तरीय बकायेदारी को लेकर संग्रह अनुभाग के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। ज़िला सहकारी बैंक, भूमि विकास बैंक और कृषि ऋण समितियों (बी – पैक्स) की डेढ़ अरब से ज्यादा की बकायेदारी दिन पर दिन बढ़ती जा रही हैं, और वसूली बाबत सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता मोहसिन जमील कभी गंभीर ही नहीं हुए।
सहकारी देयों की वसूली बाबत ज़िला प्रशासन की सख़्ती की भी सहकारिता के भ्रष्ट तन्त्र के समक्ष हवा निकलती रही हैं, नतीजतन बैंकर्स एवं राजस्व विभाग आदि के साथ मासिक बैठक में सहकारिता विभाग को शामिल न किया जाना अपने आप में बड़ा विषय है। सहकारी देयों की वसूली बाबत अंतिम बार तत्कालीन पी. गुरु प्रसाद ने सख़्ती दिखाई थी, और सहकारिता विभाग (संग्रह अनुभाग) को ख़ास दिशा निर्देश भी जारी किए थे, किन्तु उनके तबादले के बाद अपनी फितरत के मुताबिक़ यह विभाग फ़िर से गहरी नींद में चला गया और वसूली बाबत प्रशासन स्तर से कभी ज़रुरी प्रयास तक नहीं हुए।
सहकारिता का संग्रह अनुभाग जिसपर इस भारी – भरकम वसूली का दारोमदार टिका हुआ है, उसमें प्रभावी रणनीति का अभाव इस पर और ग्रहण लगा रहा है। अनुभाग के संग्रह सहायक अनिल वर्मा की हेकड़ी और उस पर एआरसीएस का कर्तव्यो के प्रति गंभीर न होने के चलते ज़्यादातर संग्रह अमीन या तो घर बैठ गए हैं या फिर उनको निष्क्रिय होने के लिए विवश कर दिया गया है। ख़बर है कि संग्रह अनुभाग के पास मौजूदा समय में तीन संग्रह अमीन वैतनिक और 12 अवैतनिक हैं, जिनपर डेढ़ अरब का कम से कम 60 फ़ीसदी वसूली लक्ष्य का दारोमदार टिका है, शासन के निर्देशों के तहत् अगले माह जून में इस लक्ष्य पूरा करना है और अब दो – तीन फ़ीसदी का आंकड़ा भी नहीं पहुंच पाया है।
सूत्रों की मानें तो तत्कालीन सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक राम नयन सिंह ने संग्रह अनुभाग के कनिष्ठ सहायक अनिल वर्मा का अपने काम के प्रति गंभीर न होने और तत्कालीन कार्यवाहक प्रभारी सचिव श्याम सुंदर श्रीवास्तव आदि की अपरोक्ष्य शिकायतों के चलते शासन स्तर पर लिखापढ़ी करके उसे यहां से स्थानांतरित करवा दिया था, जिसमें पिछले दरवाज़े से ज़िला सहकारी बैंक के तात्कालीन चेयरमैन उदय प्रताप सिंह की भी भूमिका मानी जाती हैं, जिसके बाद नए संग्रह सहायक ने वसूली अभियान को गति देना शुरू ही किया था कि संदिग्ध परिस्थितियों में अनिल वर्मा की पुनर्वापसी ने वसूली अभियान का बंटाधार कर दिया!
ख़बर है कि शासन के निर्देशों के विपरीत वसूली अभियान को गति न मिलने से जहां एक बार फिर एक और सीज़न की हवा निकलना तय है, वहीं इसके लिए जवाबदेह कौन यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
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Fatehpur: करोडों का बकाया फंसा,सहकारी देयों की वसूली के प्रति गंभीर नहीं संग्रह अनुभाग
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