रक्षाबंधन से पहले धर्म और राजनीति से जुड़ा एक बयान चर्चा में है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके धर्म और रक्षाबंधन की परंपरा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो व्यक्ति हमारे धर्म से जुड़ा नहीं है, वह हमारे धर्म की परंपराओं को कितना समझ पाएगा? इसी दौरान उन्होंने राहुल गांधी का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या उन्होंने कभी अपनी बहन से राखी बंधवाकर उसकी रक्षा करने का वचन लिया है।
‘एक बार राखी बंधवाते हुए तो दिखें’
शंकराचार्य ने रक्षाबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि त्योहार आने वाला है। ऐसे में कम से कम एक बार राहुल गांधी अपनी बहन से राखी बंधवाते हुए और उन्हें उनकी रक्षा का भरोसा देते हुए नजर आएं। उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी को कभी इस तरह देखा गया है? उन्होंने आगे राहुल गांधी की ‘रक्षा’ की समझ पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि जब उन्हें इस परंपरा और उसके भाव के बारे में ही जानकारी नहीं है, तो वह रक्षा के मायने कैसे समझेंगे।
धर्म और राजनीति पर फिर छिड़ी बहस
शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब रक्षाबंधन को लेकर देशभर में तैयारियां चल रही हैं। भाई-बहन के रिश्ते और एक-दूसरे की सुरक्षा व सम्मान के संकल्प से जुड़े इस त्योहार पर दिए गए बयान ने राजनीतिक बहस को भी हवा दे दी है। हालांकि, शंकराचार्य की टिप्पणी उनके व्यक्तिगत बयान के तौर पर सामने आई है। राहुल गांधी की ओर से इस टिप्पणी पर कोई जवाब या प्रतिक्रिया इस जानकारी में सामने नहीं आई है।
रक्षाबंधन की परंपरा क्या है?
रक्षाबंधन हिंदू परंपरा में भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा का संकल्प लेने की परंपरा निभाता है। समय के साथ इस त्योहार का भाव भी व्यापक हुआ है और इसे भाई-बहन के आपसी प्रेम, भरोसे और सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।







