फतेहपुर। जिले में बेखौफ साइबर अपराधियों ने प्रेस क्लब के पदाधिकारी और वरिष्ठ पत्रकार को अपना शिकार बनाते हुए हजारों रुपये की चपत लगा दी थी। गंभीर बात यह है कि घटना होने के लगभग दो सप्ताह बाद पुलिस ने प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की और अब घटना के दो माह से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद जांच की सुस्त रफ्तार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस की ओर से ठगी गई रकम में से 13,000 रुपये होल्ड कराने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन धरातल पर पीड़ित को अभी तक एक भी रुपया वापस नहीं मिला है। ताज्जुब की बात यह है कि इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक पीड़ित का आधिकारिक बयान तक दर्ज नहीं किया है।
कूरियर के नाम पर कॉल फॉरवर्डिंग से हैक किया व्हाट्सएप
फतेहपुर प्रेस क्लब के महासचिव व स्वतंत्र भारत के जिला संवाददाता प्रमोद श्रीवास्तव ने कोतवाली पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि जून माह में उनके पास एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को कूरियर कर्मचारी बताते हुए पार्सल डिलीवरी का बहाना बनाया और एक एमएमआई/यूएसएसडी कोड (स्टार इक्कीस स्टार नौ नौ शून्य पांच दो एक्स एक्स एक्स एक्स एक्स स्टार हज) डायल करने को कहा। कोड डायल करते ही पत्रकार के मोबाइल पर गुप्त रूप से कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई। इसके बाद जालसाजों ने उनके दो अलग-अलग व्हाट्सएप अकाउंट हैक कर लिए और संपर्क सूची में शामिल लोगों से आपातकाल का हवाला देकर पैसे मांगना शुरू कर दिया।
बेटे और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता से ठगी, डेटा भी किया नष्ट
पत्रकार के बाहर रह रहे बेटे उत्कर्ष श्रीवास्तव ने वास्तविक आपात स्थिति समझते हुए शातिर अपराधियों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड (पेटीएम – अखिलेश साहनी) पर गूगल पे के माध्यम से 25,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। इसी घटनाक्रम में हैकर्स ने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिमेष शुक्ला को भी झांसे में लेकर अपने खाते में पैसे डलवा लिए थे, जिसकी प्राथमिकी (एफआईआर) दिल्ली के पुलिस स्टेशन मुखर्जी नगर में दर्ज कराई गई थी। बाद में जब प्रमोद श्रीवास्तव ने किसी तरह अपना व्हाट्सएप रिकवर किया, तो पाया कि उनका महत्वपूर्ण डेटा और पूर्व की चैट हिस्ट्री भी पूरी तरह नष्ट कर दी गई है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ढिलाई और आश्वासन
घटना के लगभग दो सप्ताह बाद (8 जुलाई) पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66सी के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जांच अधिकारी द्वारा पीड़ित को यह आश्वासन दिया गया था कि ठगी की रकम में से 13,000 रुपये की राशि होल्ड करा दी गई है। हालांकि, दो माह से अधिक का वक्त गुजर जाने के बाद भी न तो पीड़ित के खाते में पैसा वापस पहुंचा है और न ही जांच अधिकारी ने पीड़ित का बयान दर्ज करने की जहमत उठाई है। पुलिस की इस हीलाहवाली और ढुलमुल रवैये से स्थानीय मीडियाकर्मियों और नागरिकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
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पत्रकार के साथ कूरियर स्कैम: घटना के 02 सप्ताह बाद एफआईआर, दो माह बाद भी बयान नहीं,13 हजार होल्ड पर पीड़ित का खाता खाली????
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