फतेहपुर। जिले के मलवां थाना क्षेत्र के हसनापुर गांव में पिछले कई वर्षों से संगठित तरीके से नकली खोया बनाने का बड़ा कारोबार संचालित होने की चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि यहां रातों-रात केमिकल, सिंथेटिक पाउडर और अन्य मिलावटी पदार्थों का इस्तेमाल कर भारी मात्रा में नकली खोया तैयार किया जाता है, जिसकी सप्लाई शहर क्षेत्र के कई नमकीन रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों तक की जाती है। बताया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क के तार कानपुर समेत कई अन्य जिलों से भी जुड़े हुए हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों की मानें तो देर रात तक गांव के अंदर बड़े पैमाने पर नकली खोया तैयार किया जाता है और फिर वाहनों के जरिए इसे शहर की दुकानों तक पहुंचाया जाता है। सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि जिम्मेदार विभागों को पूरे खेल की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय अधिकारियों और कारोबारियों की कथित “सेटिंग” को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
सूत्र बताते हैं कि कुछ समय पहले सीओ सर्किल स्तर पर पुलिस बल के साथ छापेमारी भी हुई थी, जहां बड़ी मात्रा में संदिग्ध खोया बरामद हुआ था। हालांकि बाद में मामला दबा दिया गया और कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मोटी सांठगांठ के चलते पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
गर्मी के मौसम में मिलावटी खोया और उससे बनने वाली मिठाइयां लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। खाद्य विशेषज्ञों के अनुसार केमिकल युक्त नकली खोया पेट, लीवर और अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा विभाग की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि गांव के लोग इस कारोबार की हकीकत से अनजान नहीं हैं, लेकिन खुलकर विरोध करने से बच रहे हैं। बताया जाता है कि गांव की बड़ी आबादी ग्राम समाज और खलिहान की जमीन पर बसी हुई है। ऐसे में यदि कोई शिकायत करता है और प्रशासन सख्ती करता है तो कई अन्य लोग भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। फिलहाल हसनापुर में चल रहे इस कथित नकली खोया कारोबार को लेकर जिले भर में चर्चाओं का बाजार गर्म है।






