फतेहपुर। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही पटाखों की बिक्री और भंडारण को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। एक तरफ प्रशासन सुरक्षा मानकों का पालन कराने और अवैध आतिशबाजी पर अंकुश लगाने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिले में पटाखा कारोबार से जुड़े कुछ बड़े नामों पर कथित मेहरबानी के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि दमकल विभाग के कुछ कर्मचारी छोटे दुकानदारों पर नियमों का डंडा चलाने में तेजी दिखाते हैं, लेकिन बड़े कारोबारियों के मामले में उनकी सख्ती अचानक ठंडी पड़ जाती है।
जानकार सूत्रों का दावा है कि जिले के कुछ इलाकों में निर्धारित क्षमता से अधिक आतिशबाजी का भंडारण किए जाने की आशंका है। बिलंदा क्षेत्र में भाई-बंधुओं से जुड़े एक बड़े लाइसेंसधारी आतिशबाजी कारोबारी को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि आसपास के गांवों में बागों और ट्यूबवेल परिसरों तक में भारी मात्रा में पटाखे रखे गए हैं। यदि इन दावों में सच्चाई है तो यह सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।
सूत्रों के मुताबिक उक्त कारोबारी ने शहर के कई क्षेत्र में भी पटाखों की दुकान खोल रखी है। सवाल यह है कि क्या संबंधित प्रतिष्ठानों और संभावित भंडारण स्थलों का अग्नि सुरक्षा मानकों के तहत नियमित सत्यापन किया जा रहा है? स्थानीय स्तर पर पुलिस और अग्निशमन विभाग के कुछ कर्मचारियों से कथित करीबी के चलते कार्रवाई प्रभावित होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
छह साल से एक ही जगह तैनाती, कार्यशैली पर सवाल
दमकल विभाग के एक कर्मचारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि कर्मचारी करीब छह वर्षों से एक ही स्थान पर जमा हुआ है और विभागीय अधिकारियों का खासमखास बन चुका है। आरोप यह भी हैं कि छोटे दुकानदारों से नियमों के नाम पर सख्ती और कथित वसूली की जाती है, जबकि बड़े कारोबारियों के मामलों में नरमी बरती जाती है। यदि ऐसा हो रहा है तो विभागीय कार्यप्रणाली और निष्पक्षता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अग्निकांड की घटनाओं के बाद इस बार प्रशासन दीपावली पर पटाखों की अस्थायी दुकानों के लिए सीमित और निर्धारित स्थान तय करने की तैयारी में है। इसके लिए दुकानदारों ने आवेदन और प्रत्यावेदन भी देने शुरू कर दिए हैं।
बड़ा सवाल: छोटे दुकानदारों के लिए नियम और बड़े कारोबारियों के लिए छूट क्यों?
आखिर दमकल विभाग की निगरानी में कथित दोहरा रवैया क्यों दिखाई दे रहा है? क्या छह वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारी की भूमिका और कार्यशैली की जांच होगी? क्या बिलंदा से लेकर शांतिनगर बाईपास तक संभावित भंडारण स्थलों का औचक निरीक्षण कराया जाएगा?
दीपावली के उल्लास के बीच किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर लाइसेंस, भंडारण क्षमता और अग्नि सुरक्षा मानकों का सत्यापन कराना चाहिए। क्योंकि आतिशबाजी के कारोबार में लापरवाही की कीमत किसी एक दुकानदार को नहीं, बल्कि पूरे इलाके को चुकानी पड़ सकती है।






