फतेहपुर। शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 460 वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन के पी सिंह कछवाह की अध्यक्षता एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी के संचालन में हुआ । मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे ।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए के पी सिंह कछवाह ने वाणी वंदना मे अपने भावप्रसून प्रस्तुत करते हुए कहा- सरस्वती मां आइए, आसन है तैयार।
पूजन, अर्चन वंदना, करें नमन स्वीकार।।
पुनः कार्यक्रम को गति देते हुए काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार से अपने अंतर्भावों को प्रस्तुत किया- जन्म जयंती पर करें,वाल्मीकि का मान। रामायण संसार को, जिसने किया प्रदान।।
डा. सत्य नारायण मिश्र ने अपने भावों को एक छंद के माध्यम से कुछ इस प्रकार व्यक्त किया – कर्म में ही नर का अस्तित्व, इसी में निहित मनुज -पुरुषत्व।
इसी का जग में महा महत्व , इसी से मिलता है देवत्व।।
कानपुर महानगर केप्रख्यात लक्ष्मण अभिनेता एवं सुविख्यात कवि दो दीप कुमार शुक्ल ‘दीप’ ने अपने भावों को मुक्तक में कुछ इस प्रकार पिरोया- आजादी के दीवानों ने,तन- मन -धन न्योछारा था।
देशप्रेम के परवानों को, राष्ट्रधर्म ही प्यारा था।।
आचार्य विष्णु शुक्ल ने पढ़ा-शीश पै मुकुट सोहै ,कर में कराल वज्र ,स्वर्ण के समान अंग रंग बजरंग को।
बाल ब्रह्मचारी, व्रतधारी ,महाबलवान, लंगर लंगोट में लपेट हैं अनंग को।।
अनिल कुमार तिवारी ‘निर्झर’ ने पढ़ा – वृंदावन की भूमि पर, फैला दिव्य प्रकाश।
राधा- माधव -गोपिका, रचा रहे मिल रास।।
प्रदीप कुमार गौड़ ने अपने क्रम में काव्य पाठ में कुछ इस प्रकार भाव प्रस्तुत किये – श्री गणेश शंकर विद्यार्थी, को मेरा सौ बार प्रणाम ।
श्रेष्ठ समर्पित पत्रकार यह, अमर शहीदों में है नाम।।
डॉ शिव सागर साहू ने काव्य पाठ में अपने भावों को कुछ इस प्रकार शब्द दिए – हम सब वलिदानी वीरों का, अभिनंदन -वंदन करते हैं। श्रद्धांजलि उन्हें समर्पित है, तन- मन से पूजन करते हैं।।
काव्य गोष्ठी के आयोजक तथा संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने एक मुक्तक के माध्यम से अपने भाव कुछ इस प्रकार व्यक्त किये – वाल्मीकि ऋषि आदि कवि, उन सा कौन महान ।
जला ज्ञान – दीपक दिया, रामायण का ज्ञान।।
कार्यक्रम के अंत में पुजारी जी ने सभी को आशीर्वाद प्रदान किया ।आयोजक ने आभार व्यक्त किया ।






