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फतेहपुर: शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 443वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी संपन्न

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फतेहपुर। शहर के मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर परिसर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के तत्वावधान में 443वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता के.पी. सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन प्रदीप कुमार गौड़ एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने संयुक्त रूप से किया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष के.पी. सिंह कछवाह ने मां सरस्वती की वंदना से किया। उन्होंने कहा—

“सरस्वती मां, वंदना, खड़े जोड़कर हाथ।
वाणी, अक्षर ज्ञान दे, करिए हमें सनाथ।।”

इसके बाद उन्होंने मातृत्व की महिमा का वर्णन करते हुए अपनी रचना सुनाई—

“मां धरती का रूप है, सब रिश्तों का सार।
उसके जैसा है नहीं, कोई निश्छल प्यार।।”

डॉ. सत्य नारायण मिश्र ने जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास का संदेश देते हुए कहा—

“जीवन का उद्देश्य नहीं है, बीच राह में रुक जाना।
जब तक लक्ष्य नहीं मिल जाता, आगे ही बढ़ते जाना।।”

राम अवतार गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—

“हरे-भरे सब वृक्ष ही, धरती के श्रृंगार।
आच्छादित कर दो धरा, कहत राम अवतार।।”

प्रदीप कुमार गौड़ ने संत कबीर की वाणी का स्मरण कराते हुए अपनी रचना सुनाई—

“कागज, कलम, दवात छुए बिन, हुए कबीर कलम के वीर।
जन-जन के मन इनकी वाणी, प्रस्तर में जो खिंची लकीर।।”

डॉ. शिव सागर साहू ने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए कहा—

“करिए पूजा प्रकृति की, जल जीवन का मान।
संरक्षण इनका करें, हो जग का कल्याण।।”

कार्यक्रम के आयोजक एवं संयुक्त संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने मुक्तक के माध्यम से सामाजिक सरोकारों और नैतिक मूल्यों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा—

“है जिनका ईमान ही, हरदम लूट-खसोट।
चोरी भी डटकर किया, ले मंदिर की ओट।।”

इसके साथ ही उन्होंने प्रेरणादायक पंक्तियां भी सुनाईं—

“छोटे से जीवन में, ऐसे बड़े काम कर जाओ।
जिससे याद करे यह दुनिया, अक्षय कीर्ति कमाओ।।”

कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी साहित्यकारों को आशीर्वाद प्रदान किया। अंत में आयोजक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने सभी अतिथियों, कवियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। गोष्ठी का समापन साहित्यिक एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुआ।

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फतेहपुर: शैलेन्द्र साहित्य सरोवर की 443वीं साप्ताहिक रविवासरीय काव्य गोष्ठी संपन्न

हनुमान मंदिर परिसर में गूंजी कविता की स्वर लहरियां, साहित्यकारों ने सामाजिक सरोकारों व प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश

फतेहपुर। मुराइन टोला स्थित हनुमान मंदिर परिसर में शैलेन्द्र साहित्य सरोवर के बैनर तले 443वीं साप्ताहिक रविवासरीय सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता के.पी. सिंह कछवाह ने की, जबकि संचालन प्रदीप कुमार गौड़ एवं शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने संयुक्त रूप से किया। मुख्य अतिथि के रूप में मंदिर के पुजारी विजय कुमार शुक्ल उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष के.पी. सिंह कछवाह ने मां सरस्वती की वंदना से किया। उन्होंने कहा—

“सरस्वती मां, वंदना, खड़े जोड़कर हाथ।
वाणी, अक्षर ज्ञान दे, करिए हमें सनाथ।।”

इसके बाद उन्होंने मातृत्व पर आधारित अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—

“मां धरती का रूप है, सब रिश्तों का सार।
उसके जैसा है नहीं, कोई निश्छल प्यार।।”

डॉ. सत्य नारायण मिश्र ने अपने छंद के माध्यम से जीवन में निरंतर आगे बढ़ने का संदेश देते हुए कहा—

“जीवन का उद्देश्य नहीं है, बीच राह में रुक जाना।
जब तक लक्ष्य नहीं मिल जाता, आगे ही बढ़ते जाना।।”

राम अवतार गुप्ता ने पर्यावरण संरक्षण पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—

“हरे-भरे सब वृक्ष ही, धरती के श्रृंगार।
आच्छादित कर दो धरा, कहत राम अवतार।।”

प्रदीप कुमार गौड़ ने संत कबीर की वाणी का स्मरण कराते हुए कहा—

“कागज, कलम, दवात छुए बिन, हुए कबीर कलम के वीर।
जन-जन के मन इनकी वाणी, प्रस्तर में जो खिंची लकीर।।”

डॉ. शिव सागर साहू ने प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए कहा—

“करिए पूजा प्रकृति की, जल जीवन का मान।
संरक्षण इनका करें, हो जग का कल्याण।।”

आयोजक एवं संयुक्त संचालक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने अपने मुक्तक के माध्यम से सामाजिक मूल्यों और नैतिकता पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा—

“है जिनका ईमान ही, हरदम लूट-खसोट।
चोरी भी डटकर किया, ले मंदिर की ओट।।”

इसके साथ ही उन्होंने प्रेरक संदेश देते हुए कहा—

“छोटे से जीवन में, ऐसे बड़े काम कर जाओ।
जिससे याद करे यह दुनिया, अक्षय कीर्ति कमाओ।।”

कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि पुजारी विजय कुमार शुक्ल ने सभी साहित्यकारों को आशीर्वाद प्रदान किया। अंत में आयोजक शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी ने उपस्थित अतिथियों, कवियों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। साहित्यिक वातावरण में आयोजित यह गोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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