उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी पारा चढ़ गया है। बीते कुछ दिनों से बहुजन समाज पार्टी में उठा-पटक चल रही है। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को एक ट्वीट जारी कर पार्टी में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुजन समाज पार्टी पूरे देश में और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में युवाओं को प्राथमिकता देने की नीति पर काम कर रही है। पार्टी संगठन में जेन-जेड की भागीदारी को लगभग पचास प्रतिशत तक सुनिश्चित करने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है।
‘युवा प्रतिभाओं को दी जाएगी प्राथमिकता’
मायावती ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा के आम चुनावों में पार्टी उम्मीदवार बनाने में समाज के सभी वर्गों के मेहनती और युवा प्रतिभाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी के माध्यम से देश में अंबेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों का तेजी से विकास करना है।
विरोधी प्रचार के खिलाफ सतर्कता का आह्वान
बसपा प्रमुख ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे विरोधी दलों, संगठनों, जातिवादी मीडिया और सोशल मीडिया के जहरीले, षड्यंत्रकारी, प्रायोजित और पेड प्रचार से सावधान रहें। उन्होंने बताया कि इनका एकमात्र उद्देश्य साम, दाम, दंड, भेद जैसी सभी प्रकार की नीच चालों को अपनाकर उत्तर प्रदेश में बसपा को सरकार बनाने से रोकना है। मायावती ने जोर दिया कि इस साजिश को किसी भी हालत में सफल नहीं होने दिया जाना चाहिए।
उन्होंने पार्टीजनों से कहा कि वे पूरे दिल, दिमाग और धन के साथ अपने अंबेडकरवादी मिशन में लगातार जुटे रहें। इसी में सभी का कल्याण यानी व्यापक राष्ट्रीय और जनहित निहित है।
निष्कासित नेताओं की वापसी की अफवाहों को किया खारिज
मायावती ने सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से फैलाई जा रही अफवाहों को पूरी तरह फेक करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण बसपा से निकाले गए लोगों को वापस लेने की कोई संभावना नहीं है। यह प्रचार पूरी तरह गलत और झूठा है। ऐसे लोग बसपा में बिल्कुल वापस नहीं लिए जाएंगे।
सुप्रीमो के इस ऐलान से पार्टी में युवा नेतृत्व को मजबूत करने और अनुशासन बनाए रखने का संदेश साफ हो गया है। 2027 के चुनावों की तैयारी में बसपा अब नई पीढ़ी पर फोकस कर रही है, ताकि अंबेडकरवादी विचारधारा को और व्यापक आधार मिल सके। मायावती के निर्देशों के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होने की उम्मीद है।







