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फतेहपुर जनपद स्थापना दिवस  : 10 नवंबर 2026 दिन मंगलवार -लेखक :  शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी

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   अपना  फतेहपुर जनपद आगामी 10 नवंबर 2026 दिन मंगलवार को अपना 200 वां जन्मदिन मना रहा है । वैदिक काल से ही यह अत्यंत गौरवशाली  तथा धनधान्य  संपन्न है। तभी से यह अंतर्वेद और पुण्यक्षेत्र के नाम से जाना जाता  रहा। जो आज भी पूजा- उपासना में संकल्प के अवसर में प्रयुक्त होता है।
वाल्मीकि रामायण में लोकनायक राम ने भी मुक्तकंठ से इसकी समृद्धि की प्रशंसा की है ।
  पौराणिक काल में यह कन्नौज की राज्य सीमा के अंतर्गत आता था जिसके शासक महाराज विश्वरथ  थे जो कालान्तर में ऋग्वेद के अनेक सूक्तों के रचनाकार दृष्टा ऋषि   तथा ब्रह्मर्षि विश्वामित्र के नाम से प्रसिद्ध हुए। बाद में बौद्ध काल में इसकी ख्याति   दश महाजनपदों में से वत्स महाजनपद के नाम से रही। जिसके शासक महाराज उदयन विविध महाकाव्यों के नायक भी हैं। उनका सौंदर्य,  उनकी ललित कलाप्रियता आज भी स्मरणीय है। जिनकी राजधानी वर्तमान कौशाम्बी ही थी । जिनके राजप्रासादों के भग्नावशेष यमुना के किनारे आज भी उनकी  गुणज्ञता एवं गौरव का गान कर रहे हैं। कविकुलगुरु कालिदास ने पूर्व मेघदूत के 32वें श्लोक में उनका उल्लेख करते हुए कहा है – “प्राप्यावन्तीम् उदयनकथा कोविदग्रामवृद्धान्  ,
पूर्वोद्दिष्टामनुसर पुरीं श्री विशालां विशालाम्।
स्वल्पीभूते सुरचितफले स्वर्गिणां गां गतानां ,
शेषै: पुण्यै: हृतमिव दिव: कांतिमत् खंडमेकम्।।”
“ख्यात है अवंती जहां केतिक निवास करें,
पंडित जनय्या उदयन की कथान के।
जाइके तहां प्रवेश कीजो वा विशाला बीच ,
देख लीजो शोभा साज सकल जहान के।।
भूमि ते गए जो नर देवलोक भोगिबे को
करि -करि काज बड़े धर्म और प्रमान के ।
तेई फेरि आये , संग स्वर्ग सारभाग  लाए,
प्रबल प्रताप मनो शेष पुन्न दान के।।” ( पद्यानुवाद राजा लक्ष्मण सिंह )
वर्तमान में इस दोआबा क्षेत्र या अपने जनपद का वर्णन यदि एक छंद में करना हो तो कुछ इस प्रकार होगा-
“जमुना दिसि दक्खिन बास करैं,
जमफंद निवारि उद्धारिबे को।
अरु उत्तर गंग उछाह भरैं,
सब पाप बिनासिबे- तारिबे को।।
दिसि पूरब तीरथराज औ,
पच्छिम कर्णपुरी धन धारिबे को।
थवईसुर संभु रहैं इत ही,
नित ही सुखसाज संवारिबे को।।”
  यहां पर गुप्तकालीन मंदिरों से लेकर के उस कालखंड के सिक्के इत्यादि प्राप्त होने से उस समय भी इसकी उपस्थिति अनुभव की जा सकती है । तेंदुली, कुरारी, धमिना, ठिठौरा ,असनी इत्यादि के ईटों से निर्मित गुप्त कालीन मंदिर ,रेय से  प्राप्त भगवान विष्णु की मूर्ति तथा मझलिगो स्थित एकमुखी शिवलिंग इसकी प्राचीनता सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं । चीनी यात्री ह्वेनसांग का भी असनी में आना विभिन्न ग्रंथों के माध्यम से प्रमाणित  हो चुका है। सांखा ग्राम में बुद्ध भगवान की विशाल प्रतिमा उसे बौद्ध काल के अतीव महत्वपूर्ण स्थान के रूप में प्रतिस्थापित करती है। बाद में समय के करवट बदलते विभिन्न राजवंशों ने इस पर शासन किया ।यहां पर गौतम क्षत्रियों का भी बहुत काल तक वर्चस्व रहा। जिसके कारण इसका गौतमाना नाम भी शामिल है।
इसका नाम राजा फतेहचंद, फतेहमंद खान अथवा अठगढि़ या राजा सीतानंद को जौनपुर के नवाब इब्राहिम शाह के द्वारा फतेह किए जाने पर फतेहपुर नाम पड़ा , यह  आज भी विवाद का विषय है।
  1736 तक यह क्षेत्र अवध के नवाबों के अधीन रहा । बाद में 1750 तक मराठा राज्य के , 1753 तक पठानों के और पुनः 1764 तक अवध के नवाबों के आधिपत्य में रहा। इसी वर्ष तत्कालीन नवाब ने ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथ संधि स्वरूप इसे सौंप दिया लेकिन ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1774 में इसे पुनः तत्कालीन अवध के नवाब वजीर खान को दे दिया  और 1801 में अवध के नवाबों द्वारा इसे पुनः अंग्रेज सरकार के हाथों सौंप दिया गया। 1803 से 1824 तक इलाहाबाद में इससे संबंधित जज मजिस्ट्रेटी का काम चला। 1814 में भिटौरा में ज्वाइंट मजिस्ट्रेटी कायम हुई लेकिन अनेक कठिनाइयों के कारण 1825 में ज्वाइंट मजिस्ट्रेटी फतेहपुर  आ गई। 31 अगस्त 1826 में (कुछ लोगों के कथनानुसार 10 नवंबर 1826) में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड एम हार्स्ट ने कानपुर और इलाहाबाद के 13 परगनों को जोडकर इस जिले को फतेहपुर जिले का नाम दिया और तभी से कानपुर – इलाहाबाद के बीच यह जिला प्रकाश में आया ।यह जनपद 57 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में विस्तृत तीन तहसीलों ,13 ब्लॉक और छह विधानसभाओं से संयुक्त है। इसकी साक्षरता 58.6% है और जिले का लिंगानुपात 1000 और 901 है। इसकी 87.77% आबादी गांव में तथा 12.23% आबादी शहरों में निवास करती है। 2011 की जनगणना के अनुसार 26 32 733 इसकी जनसंख्या है।
   इसके प्रमुख दर्शनीय, पर्यटन एवं ऐतिहासिक स्थलों में खजुआ की बावनी इमली, बागबादसाही, पैवेलियन, हथगाम में जयचंदी मस्ज़िद के नाम से मशहूर राजा जयचंद के किले का अवशेष , जहानाबाद का सोरही  मंदिर और राजमहल, असोथर का किला, सांखा ग्राम में बुद्ध भगवान का मंदिर, शिवराजपुर और असनी के प्राचीन मंदिर, मझलिगो स्थित एकमुखी शिवलिंग तथा वहीं झील में उत्पन्न होने  वाली रुद्रवंती ओषधि  , कोराई ग्राम के उत्तरी छोर पर पड़ने वाले प्राचीन मंदिर और कुएं, हंसवा का रानी तालाब , आबूनगर फतेहपुर में आबू खां का मक़बरा जो प्राचीन कृष्ण या शिवमंदिर के रूप में विवाद का विषय हो गया है। धाता की ओर जाने वाले मार्ग में अंग्रेजों द्वारा  बनवाया हुआ दो खंड का ससुरखदेरी पर निर्मित पुल , जिसके नीचे ससुर खदेरी नदी ,ऊपर नहर प्रवाहित हो रही है तथा अगल-बगल  कोठरियां बनी हुईं और उनके ऊपर दोनों ओर आने जाने का चौड़ा पक्का रस्ता बना हुआ है,आदि हैं ।
  यहां के महापुरुषों और प्रसिद्ध व्यक्तियों में जोधा सिंह अटैया, दरियाव सिंह ,भगवंत राय खींची , असनी के नरहरि बंदीजन ,लाला भगवान दीन ‘दीन’, राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी ,रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ , रमानाथ अवस्थी, बाबू वंश गोपाल ,गणेश शंकर विद्यार्थी ,डॉक्टर असगर वजाहत इत्यादि हैं।
यहां लोग ‘क्षणे रुष्टा, क्षणे तुष्टा’  होने पर भी  अत्यंत मिलनसार , हंसमुख और जिंदादिल इंसान हैं । आज तक कभी भी किसी भी प्रकार का धार्मिक दंगा न होना ही इसकी सबसे बड़ी पहचान है । इस  कुटिल राजनीतिक विषाक्त वातावरण में भी सभी जातियां एवं सभी धर्मों के लोग परस्पर  अत्यंत प्रेमभाव से मिलजुलकर  रह रहे हैं ,यह बहुत बड़ी बात है । ईश्वर से यही प्रार्थना है  कि वह आपस में ऐसा ही प्रेम एवं सद्भाव सदैव बनाए रखे।
” दिन – प्रतिदिन उन्नति करे, पंथ प्रेम का थाम ।
जिला फतेहपुर हर फतेह, कर होवे सरनाम।।”

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