भगवान आशुतोष शिव और भगवती शिवा अंबा पार्वती के सम्मिलित तेजस् तत्व से उत्पन्न भगवान कार्तिकेय गंगानंदन, षडानन, कुमार तथा स्कंद के नाम से भी प्रसिद्ध हैं । दक्षिण भारत में इन्हें ही मुरूगन तथा सुब्रमण्यम स्वामी के नाम से जाना जाता है। इनका जन्म अगहन की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को हुआ था। जो इस वर्ष 26 नवंबर 2025 को पड़ रही है। इसलिए इस दिन इनकी विशेष पूजा का विधान है।
इनके द्वारा ही तारकासुर का संहार हुआ। क्रौंच पर्वत में इनका निवास था। जिसे परशुराम जी ने अपने वाणों से विदीर्ण कर दिया। वह स्थल आज भी परशुराम-द्वार या हंसद्वार कहलाता है । इनका वाहन मयूर है। यह अक्षय शक्ति के प्रतीक रूप में सर्वपूज्य हैं।
छोटे भाई गणेश का विवाह पहले ही हो जाने से यह रुष्ट हो श्रीशैल पर चले गए । लेकिन जब शिवपार्वती इन्हें मनाने मल्लिकार्जुन के रूप में वहां पहुंचे तो उसका भी परित्याग कर यह और भी आगे दक्षिण की ओर निकल गए।
उत्तर भारत में इन्हें आजीवन ब्रह्मचारी किंतु दक्षिण भारत में देवसेना और वल्ली नामक दो पत्नियों से विवाहित मानते हैं। गणेश जी भगवान शंकर के गणों के अधिपति हैं तो यह देवताओं के सेनापति हैं।
“हे शिवांश, हे शिवशंकरसुत, शत-शत कोटि-कोटि वंदन ।
करो शत्रुदल का मदमर्दन, अभिनंदन, शत अभिनंदन।।”
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मार्गशीर्ष शुक्ला षष्ठी – भगवान कार्तिकेय जन्मोत्सवलेखक – शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी
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