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आजादी के 78 साल बाद भी नहीं मिला रास्ता: शव को पानी भरे गेहूं के खेतों से ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण, वीडियो वायरल

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नरसिंह मौर्य

असोथर (फतेहपुर) आजादी के इतने दशकों बाद भी अगर किसी बस्ती को अंतिम संस्कार तक के लिए रास्ता नसीब न हो, तो यह विकास के दावों पर करारा तमाचा है। नगर पंचायत असोथर के वार्ड नंबर 7 स्थित विद्यातीपुर के बरगदी मोहल्ले से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीण एक वृद्ध के शव को पानी भरे गेहूं के खेतों से होकर अंतिम संस्कार के लिए ले जाते दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि बुनियादी सुविधाओं से वंचित एक पूरे समुदाय की पीड़ा को भी बयां करता है।
जानकारी के अनुसार, बरगदी मोहल्ला निवासी 75 वर्षीय मंतू निषाद पुत्र स्व. भागीरथ निषाद का शनिवार रात बीमारी के चलते निधन हो गया। वर्षों से बीमार चल रहे मंतू निषाद को अंतिम यात्रा के लिए भी सम्मानजनक रास्ता नसीब नहीं हुआ। मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों को शव को गेहूं के पानी भरे खेतों और खेतों की मेड़ों से होकर श्मशान तक ले जाना पड़ा। इस दृश्य ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख दिया।
मृतक की पत्नी रमुइया देवी (70) और पुत्र रज्जन, सज्जन व रजोल निषाद का रो-रोकर बुरा हाल है। सभी बेटियों की शादी हो चुकी है। छोटे पुत्र रजोल निषाद ने बताया कि पिता लंबे समय से बीमार थे, लेकिन आज तक उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या शौचालय जैसी बुनियादी योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका। मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले रजोल ने कहा कि नगर पंचायत में शामिल होने के बावजूद उनकी बस्ती आज भी विकास से कोसों दूर है।
ग्रामीणों रामप्रकाश निषाद, रामरूप निषाद और राजेश ने बताया कि बरगदी मोहल्ले में मछुआरा समुदाय के करीब 25 परिवार रहते हैं, जिनकी आबादी लगभग 120 है। आजादी से लेकर अब तक इस बस्ती को पक्का रास्ता नहीं मिला। बच्चे खेतों की मेड़ों से होकर स्कूल-कॉलेज जाने को मजबूर हैं। बीमारी या प्रसव के समय एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, खाट या बांस की झोली बनाकर मरीजों को बाहर ले जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में हालात और बदतर हो जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बाजार, अस्पताल और अन्य जरूरी कामों के लिए उन्हें सुजानपुर माइनर पार करनी पड़ती है, कई बार कपड़े उतारकर पानी से गुजरना पड़ता है। शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण यह बस्ती आज भी सड़क, आवास और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
वायरल वीडियो के बाद प्रशासन पर सवालों की बौछार है। ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है और वे मांग कर रहे हैं कि सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल पक्का रास्ता बनवाया जाए, ताकि भविष्य में किसी को इस तरह अपमानजनक हालात का सामना न करना पड़े।

वहीं इस पूरे मामले पर नगर पंचायत असोथर के अधिशासी अधिकारी हरिंगेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि बरगदी मोहल्ले की समस्या पुरानी है। अधिशासी अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि नगर पंचायत स्तर से जो भी संभव होगा, वह किया जाएगा और संबंधित विभागों से समन्वय कर समाधान निकाला जाएगा।

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