विश्व के समस्त कैलेंडर सूर्य अथवा चंद्रमा पर आधारित हैं। जैसे इस्लामिक कैलेंडर पूर्णतया चंद्रमा पर आधारित है और इसका वर्ष प्रारंभ मोहर्रम की पहली तारीख है । अंग्रेजी या मिशनरी कैलेंडर पूर्णतया सूर्य पर आधारित है जिसका वर्ष प्रारंभ प्रथम जनवरी है लेकिन हिंदू कैलेंडर विक्रम संवत सूर्य और चंद्रमा दोनों के सामंजस्य से निर्मित चैत्र नवदुर्गा की प्रथम तिथि गुड़ी पड़वा से आरंभ होता है। आइए भारत के विविध नव वर्षोत्सवों पर नजर डालते हैं।
पंजाब और हरियाणा में वर्ष की प्रथम तिथि वैशाख का प्रथम दिन बैसाखी है।केरल में मलयालम के प्रथम महीने मेष की प्रथम तिथि विशू से ही नव वर्ष का प्रारंभ माना जाता। तमिलनाडु में पुथांडु या प्रथुरुषम नाम से नव वर्ष का प्रारंभ है जो ग्रेगॅरियन कैलेंडर के प्रथम महीने चिदेआई की प्रथम तिथि है। गुड़ी पड़वा का वर्णन पहले ही हो चुका है जो गोवा, महाराष्ट्र सहित उत्तर एवं दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में प्रतिष्ठित है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों में उगादी या युगादि नाम से चैत्र के प्रथम दिन से नव वर्ष की मान्यता है। असम में बोहाग बिहू के नाम से यह पर्व वैशाख की प्रथम तिथि को मनाया जाता। बंगाल में वैशाख के पहले दिन को पोइला वोइशाख कह कर नववर्ष का स्वागत धूमधाम से होता है। बैंकों, शैक्षिक सत्र और शासकीय वर्ष का नवारंभ भी अप्रैल की प्रथम तारीख ही है।
“मंगलमय नववर्ष हो, बढ़े हर्ष- उत्कर्ष।
दुख – दरिद्रता दूर हों, मिटें शोक – संघर्ष ।।”
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मंगलमय नववर्ष हो, बढ़े हर्ष- उत्कर्ष। दुख – दरिद्रता दूर हों, मिटें शोक – संघर्ष ।।”विविध नव वर्षोत्सव – लेखक : शैलेन्द्र कुमार द्विवेदी
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